Dr. Lajpat Rai Mehra (जनक - न्यूरोथेरेपी)
डॉ. लाजपत राय मेहरा जी ने लाखों लोगों को रोगमुक्त जीवन देने, न्यूरोथेरेपी को जन-जन तक पहुँचाने का महान कार्य किया। भारतीय वैदिक चिकित्सा सिद्धांतों पर आधारित इस दवा-रहित पद्धति के द्वारा असाध्य रोगों का सफल उपचार संभव बनाया।
जीवन परिचय एवं महान अवदान
डॉ. लाजपत राय मेहरा जी (23 अगस्त 1932 – 18 अक्टूबर 2017) जिन्हें न्यूरोथेरेपी जगत में आदरपूर्वक "गुरुजी" कहा जाता है, भारत के एक अद्वितीय चिकित्सा वैज्ञानिक और शोधकर्ता थे। उन्होंने 60 वर्षों से अधिक के गहन व्यक्तिगत शोध के पश्चात लाजपत राय मेहरा न्यूरोथेरेपी (LMNT) का आविष्कार किया।
डॉ. लाजपत राय मेहरा जी: जीवन, संघर्ष और न्यूरोथेरेपी की खोज
1. प्रारंभिक जीवन और चमत्कारिक मोड़ (1943)
डॉ. लाजपत राय मेहरा जी का जन्म 23 अगस्त 1932 को अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। 1943 में, जब वे मात्र 11 वर्ष के थे, तो उन्हें पेट में भीषण और असहनीय दर्द हुआ। कई डॉक्टरों की दवाइयों के बाद भी कोई आराम नहीं मिला। तब उनके पड़ोस में रहने वाली एक बुजुर्ग माताजी ने उन्हें पेट के बल लेटने को कहा और उनके पैरों के पिछले हिस्से (Thighs and Legs) पर अपने पैरों से निश्चित स्थान पर कुछ मिनट तक हल्का दबाव दिया। आश्चर्यजनक रूप से, मात्र 5 मिनट में बालक लाजपत राय का पेट दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया। इस घटना ने उनके बाल-मन पर गहरा प्रभाव डाला और उनके भीतर यह जिज्ञासा जगाई कि शरीर के किसी अंग पर दबाव देने से आंतरिक अंग कैसे ठीक हो जाते हैं।
2. 60 वर्षों का निरंतर शोध और शरीर क्रिया विज्ञान (Anatomy & Physiology)
इसी उत्सुकता से प्रेरित होकर डॉ. मेहरा जी ने प्राच्य भारतीय मालिश परंपराओं, प्राचीन नाड़ी विज्ञान और आधुनिक मानव शरीर रचना (Anatomy & Physiology) का गहराई से अध्ययन करना शुरू किया। उन्होंने विभिन्न अंगों, रक्त वाहिनियों (Vessels), नसों (Nerves) और अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands - जैसे Pancreas, Thyroid, Pituitary, Adrenal, Liver, Kidney, Thymus) पर पैरों और हाथों के दबाव का क्या प्रभाव पड़ता है, इसका 60 वर्षों तक हजारों मरीजों पर प्रयोग और अवलोकन किया।
3. न्यूरोथेरेपी (LMNT) का वैज्ञानिक स्वरूप
डॉ. मेहरा जी ने पाया कि जब किसी ग्रंथि को पर्याप्त रक्त संचार (Blood Circulation) नहीं मिलता, तो वह सही मात्रा में एंजाइम या हार्मोन नहीं बना पाती, जिससे रोग उत्पन्न होते हैं। उन्होंने शरीर के विशिष्ट बिंदुओं पर 6 सेकंड का समयबद्ध दबाव (6-Second Pressure Technique) देने का नियम खोजा। इस दबाव से बिना किसी दवा के, सीधे लक्षित अंग (Target Organ) तक ऑक्सीजनयुक्त रक्त पहुँचाया जाता है, जिससे वह अंग पुनः सही ढंग से कार्य करने लगता है।
4. सूर्यमल आश्रम एवं संस्थान की स्थापना (1998)
अपने ज्ञान को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने और देश भर के युवाओं को रोजगार तथा सेवा का मार्ग दिखाने के लिए डॉ. मेहरा जी ने 1998 में महाराष्ट्र के पालघर (नासिक रोड) स्थित सूर्यमल में डॉ. लाजपत राय मेहरा न्यूरोथेरेपी अकादमी (Suryamal Ashram) की स्थापना की। यहाँ देश के कोने-कोने से आए छात्र-छात्राओं को आवासीय वातावरण में न्यूरोथेरेपी का सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाने लगा।
5. लाखों असाध्य रोगियों को नवजीवन
डॉ. मेहरा जी के मार्गदर्शन में लकवा (Paralysis), मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Muscular Dystrophy), सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy - CP Child), डायबिटीज, सर्वाइकल, साइटिका, आर्थराइटिस, किडनी विकार और पेट की गंभीर बीमारियों से पीड़ित लाखों मरीजों का बिना किसी दवा, इंजेक्शन या सर्जरी के सफल इलाज किया गया।
6. अमर विरासत एवं संदेश
2012 में डॉ. लाजपत राय मेहरा जी इस भौतिक संसार से विदा हो गए, लेकिन उनके द्वारा स्थापित लाजपत राय मेहरा न्यूरोथेरेपी (LMNT) आज पूरे भारत और विदेशों में 5,000 से अधिक कुशल न्यूरोथेरेपिस्टों और 1,000 से अधिक उपचार केंद्रों के माध्यम से लाखों लोगों को निरोगी जीवन प्रदान कर रही है।
न्यूरोथेरेपी के मूलभूत वैज्ञानिक सिद्धांत
डॉ. मेहरा जी द्वारा प्रतिपादित दवा-रहित चिकित्सा के 4 प्रमुख आधार स्तंभ
रक्त प्रवाह का नियमन
विशिष्ट अंगों की ओर 6 सेकंड के सटीक दबाव से रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह मोड़कर निष्क्रिय ग्रंथियों को पुनर्जीवित करना।
Acid-Alkaline संतुलन
रक्त एवं शरीर के तरलों में एसिड (तेजाब) और अल्कालाइन (क्षार) का pH संतुलन बनाकर वात, पित्त, कफ दोषों को दूर करना।
नाभि चक्र (Nabhi Setting)
शरीर के ऊर्जा केंद्र 'नाभि' (Navel) के खिसकने को ठीक कर पाचन तंत्र और संपूर्ण चयापचय (Metabolism) को दुरुस्त करना।
प्राकृतिक रसायन निर्माण
बिना एलोपैथिक दवा के शरीर की अपनी ग्रंथियों से इंसुलिन, थायरोक्सिन, डोपामाइन, सेरोटोनिन आदि हार्मोन्स का प्राकृतिक उत्पादन।
न्यूरोथेरेपी की खोज और विकास यात्रा
11 वर्ष की आयु में पेट दर्द से मुक्ति से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर न्यूरोथेरेपी की स्थापना तक।
चमत्कारी प्राथमिक अनुभव
अमृतसर में बचपन के दौरान पेट के भीषण दर्द से पीड़ित होने पर एक वृद्ध पड़ोसी के कहने पर पैरों के विशेष दबाव बिंदु से कुछ ही मिनटों में दर्द गायब हो गया।
शारीरिक क्रिया विज्ञान शोध
30 वर्षों तक मानव शरीर रचना, रक्त संचार, नाड़ी तंत्र और अंतःस्रावी ग्रंथियों (Pancreas, Thyroid, Pituitary) पर 100+ सटीक न्यूरोथेरेपी फॉर्मूलों का आविष्कार किया।
सूर्यमल आश्रम की स्थापना
महाराष्ट्र के सूर्यमल (नासिक रोड) में आवासीय न्यूरोथेरेपी अकादमी की स्थापना की, जहाँ युवाओं को डिप्लोमा प्रशिक्षण देकर रोजगार प्रदान किया गया।
राष्ट्रीय प्रसार एवं प्रभाव
5,000 से अधिक योग्य न्यूरोथेरेपिस्ट एवं 1,000+ OPD केंद्रों के माध्यम से 5 लाख से अधिक असाध्य मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है।
डॉ. मेहरा जी द्वारा विकसित प्रमुख फॉर्मूले
बिना किसी दवा के मानव अंगों को क्रियाशील करने वाले प्राकृतिक न्यूरोथेरेपी फॉर्मूले।
गैस-ग्लैंड फॉर्मूला (Gas-Gland)
पाचन तंत्र, आंतों एवं यकृत (Liver) को सक्रिय कर पेट की गैस, एसिडिटी, कब्ज और अपच को जड़ से समाप्त करता है।
पेनक्रियाज स्टिम्यूलेशन (Pancreas Clear)
अग्न्याशय (Pancreas) को उत्तेजित कर प्राकृतिक रूप से इंसुलिन का निर्माण कराता है, जिससे मधुमेह (Diabetes) नियंत्रित होता है।
एसिड-अल्कालाइन बैलेंस (pH Balance)
रक्त में तेजाब (Acid) और क्षार (Alkaline) के स्तर को संतुलित कर गठिया, जोड़ों का दर्द और गुर्दे (Kidney) की बीमारियों को ठीक करता है।
कुण्डलिनी व स्पाइन पॉइंट (Spine Setting)
रीढ़ की हड्डी (Spine) और नसों के दबाव को मुक्त कर सर्वाइकल, साइटिका, कमर दर्द और पैरालिसिस मरीजों का सफल पुनर्वास करता है।
मन्दबुद्धि एवं सीपी चाइल्ड केयर
मस्तिष्क की पिट्यूटरी और पीनियल ग्रंथियों को ऑक्सीजनयुक्त रक्त पहुँचाकर मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों के विकास में मदद करता है।
थायराइड एवं हार्मोन रिपेयर
थायराइड ग्रंथि को सक्रिय कर वजन असंतुलन, महिलाओं की हार्मोनल समस्याओं एवं सुस्ती को स्थायी रूप से ठीक करता है।